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Satellite Based Toll System : Satellite Based टोल सिस्टम क्या है, जो FASTag और टोल बूथ को खत्म कर देगा

Satellite Based Toll System : केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया एलान भारत में सैटेलाइट बेस्ड टोल सिस्टम (Satellite based toll system) जल्द लांच होगा। फिलहाल अभी भारत में टोल के लिए फास्टैग का इस्तेमाल किया जा रहा है। आइए हमलोग इस आर्टिकल के माध्यम से जानते है Satellite Based Toll System के बारे में

Satellite Based Toll System
Satellite Based Toll System

Satellite Based Toll System :

केंद्री परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कुछ दिन पहले एक बड़ी घोषणा की है। उन्होंने कहा है कि वे जल्द ही सैटेलाइट बेस्ड टोल सिस्टम लांच करेंगे इसका मतलब है कि आपका पैसा अब सैटेलाइट के माध्यम से ही कट जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने ये दावा भी किया है कि ये सर्विस फास्टैग से भी तेज होगी। हालांकि ये सिस्टम कब लांच होगा अभी तक इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई है।

सैटेलाइट बेस्ड टोल सिस्टम के बारे में पिछले महीने नितिन गडकरी ने राज्यसभा में भी कहा था कि “2024 के लोकसभा चुनावों में आचार सहिंता लगने से पहले ही हम ये कोशिश करेंगे कि हम सैटेलाइट बेस्ड टोल सिस्टम (Satellite based toll system) ला पाएं। उन्होंने कहा पिछले 3 सालों से सरकार इसपे काम कर रही है और ये टेक्नोलॉजी फास्टैग को रिप्लेस करेगी।” वर्त्तमान समय में टोल प्लाजा पर लगने वाले समय को कम करने के लिए फास्टैग का इस्तेमाल किया जा रहा है।

Satellite Based Toll System क्या है? 

केंद्र सरकार इस नई पहल के जरिए फिजिकल टोल को खत्म करना चाहती है। जिससे हाईवे पर लोगों को बिना रुके शानदार एक्सपीरियंस मिले। इसके लिए सरकार GNSS बेस्ड Satellite Based Toll System का इस्तेमाल करेगी। जी वर्त्तमान समय में इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम को खत्म करेगी।

FASTag कैसे काम करता है?

FASTag को भारत सरकार ने साल 2016 में शुरुआती दौर पर 247 टोल बूथ पर लागू किया था। जिसमे बाद जनवरी 2021 में इसका इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया। साल 2016 से लेकर अभी तक करीब 8.13 करोड़ FASTag इशू किए गए है। आपको बता दे, आपकी गाड़ियों पर लगी FASTag रेडियो फ्रीक्वेंसी पर काम करता है जिसमे एक माइक्रो चिप होती है और एक एंटीना।

FASTag चिप पर गाड़ी की डिटेल्स होती है जैसे कि गाड़ी की रजिस्ट्रेशन नंबर, गाड़ी के मालिक का नाम, कौन सी गाड़ी है और उसके साथ कौन सा बैंक अकाउंट लिंक है और आप जब टोल के पास जाते है तो वहां एक एंटीना लगा होता है या किसी पोल के साथ या किसी टोल स्टेशन के ऊपर। इसके बाद एंटीना को चिप से जैसे ही सिग्नल मिलता है उसी समय आपके बैंक अकाउंट से पैसे कट जाते है या यूं कहे आपका टोल कट जाता है और यहां पर ये जानना जरुरी है कि हर टोल के अपने एक फिक्स्ड प्राइस होते है। अब हम ये तो बता दिए FASTag कैसे काम करता है और अब हम आपको ये बताएंगे कि नया Satellite Based Toll System कैसे काम करने वाला है और ये FASTag से कैसे अलग होगा।

Satellite Based Toll System कैसे काम करता है?

सैटेलाइट बेस्ड टोल सिस्टम (Satellite based toll system) जीपीएस (GPS) से काम करेगा, इसमें सबसे पहले गाड़ियों की रजिस्ट्रेशन ग्लोबल नेविगेशन सिस्टम सैटेलाइट (GNSS) में की जाएगी और एक ऑन बोर्ड यूनिट लगाया जाएगा। ये यूनिट आपके वाहन को ट्रैक करेगा और टोल को भी हटा दिया जाएगा। लोगो को कहीं रुकने की जरूरत नहीं होगी सिर्फ एंट्री और एग्जिट पर गाड़ी की नंबर प्लेट की फोटो ली जाएगी और केवल इतनी ही दूरी का टोल टैक्स लिया जाएगा।

इसका पैसा वाहन चालक के बैंक अकाउंट से कट जाएगा यानि हर टोल बूथ पर गाड़ी को नहीं रुकना पड़ेगा या आसान भाषा में समझा जाए तो टोल बूथ ही खत्म कर दिए जाएंगे और आपके वाहन कौन सी स्टेट या जगह में इंटर किया है वो GPS के जरिए ही डिटेक्ट कर लिया जाएगा और उसी के अनुसार आपके पैसे भी कट जाएंगे।

सड़क परिवहन मंत्री के मुताबिक, इसे दिल्ली और गुरुग्राम की सड़के पर इसका ट्रायल कर लिया गया है और बैंगलोर में इसका ट्रायल तुंरत शुरू किया जाएगा। हालांकि इस टेक्नोलॉजी को लागू करने के लिए सरकार को कुछ एक्ट्स में भी बदलाव करने होंगे जैसे कि मोटर गाड़ी एक्ट 1988 और नेशनल हाईवे। हालांकि टोल हटने से आपकी यात्रा और भी मंगलमय हो सकती है।

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